Tuesday, October 14, 2008

बचपन

आज सावन की बारिश बरसी
मन करता है भीगने जाऊं, 
देखा जब छोटे बच्चों को 
चलाते कागज़ की नाव,
मन किया जाऊं उनके साथ
जी लूँ अपना बचपन,
लेकर कागज की नाव दौड़ूं नंगे पांव
बचपन में कोई सुधबुध नहीं थीं
कि हमारा जीवन है 
किस ठौर किस गांव ।

13 comments:

shama said...

...............................,
Barastee badreeko mai,
Band khidkeese dekhtee hun,
Bheegnese bachtee hun,
Jab"bheego mat"kehnewale,
Mere paas nahee,
To bheegname mazaabhee nahee...
..........................."
Anek shubhechhaon sahit swagat!!
Badaahee achha likha hai apne !
Gar ye word verification hata den to kaisa rahega?

shama said...

Ye kuchh shuruaatee panktiyan hai meree uprokt kaavitaaki..
"Jab, jab puraanee tasweeren,
Kuchh yaden taza kartee hain,
Hanste, hanstebhee,
Meree aankhen bhar aatee hain,
Wo gaanv nigaahonme basta hai,
Phir sabkuchh ojhal ho jaata hai,
Ghar bachpanka mujhe bulata hai....
............................"
Shama
Samajhme aanese pehle bachpan haathse phisal jaata hai...

रश्मि प्रभा... said...

बहुत ही प्यारे ख्याल........

सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी said...

:) :) :) :) सुन्दर!

श्यामल सुमन said...

रचना पढने के बाद बचपन की याद ताजी हो गयी।

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
मुश्किलों से भागने की अपनी फितरत है नहीं।
कोशिशें गर दिल से हो तो जल उठेगी खुद शमां।।
www.manoramsuman. blogspot. com

Richa Joshi said...

कागज की नाव और वह बरसातें जब बहुत पीछे छूट जाती हैं तब बहुत याद आती हैं।

हें प्रभु यह तेरापंथ said...

पुनमजी ।

आपकी भावनओ कि मै सहराना करता हु। आपका स्वागत है। साहित्यक भाषा की जगह जन भाषा के उपयोग से मुझे प्रसन्ता है।

भविष्य मे भी अपनी भाषा को इसी तरह सरल बना कर रखना। हार्दीक मगल कामना।

ॐ भिक्षु जय भिक्षु

महावीर बी सेमलानी "भारती"

मुम्बई

१५/१०/२००८

प्रदीप मानोरिया said...

बहुत सुंदर आपका चिठ्ठा जगत में स्वागत है . मेरे ब्लॉग पर दस्तक देकर देखें अन्दर कैसे व्यंग और गीत रखे हैं

Aruna Kapoor said...

Sunder dhabdon ka satik prayog...swagat hai!

Anonymous said...

Har vyakti bada hone ke bad bachpan ko bahut yad karta hai, aapne sundar shabdo me ise vyakt kiya hai.
kisi shayar ki mujhe ye lines yaad aa rahi hai...

Ye daulat bhi le lo, ye shohrat bhi le lo,
bhale chheen lo mukh se meri jawani,
magar mujhko lauta do bachpan ka sawan,
vo kagaj ki kashti, vo barish ka pani.


---------------------Vishal

भावनाएँ said...
This comment has been removed by the author.
भावनाएँ said...

तुम मेरी बुहुत अच्छी सी प्यारी सी दोस्त हो, तुम अपना अच्छा सा लिखो । मै तुमपे प्रसन्न हूँ। तुमने अपने ब्लाग मे काफी अच्छा सामान लिखा है जो की मुझे बहुत अच्छा लगा।आपका इस सुन्दर नगरी मे सुह्रद स्वागत है । बोले तो.....
YOUR MOST "WELCOME" BABY. U R MY SWEETEST FRIEND IN THE "WORLD". I M VERY HAPPY TAHT U R MY FRIEND.

Unknown said...

Good show, Keep it up...........