Tuesday, October 21, 2008

विचारों के पक्षी

मन के आकाश में
विचारों के पक्षी
उड़ते हैं दूर-सुदूर
किसी सुख-प्राप्ति की लालसा में
किन्तु उन्हें नहीं पता
कि 
वहां 
नहीं बनाए जा सकते
सपने, इच्छाएं, महत्त्वाकांक्षाएं ।

अचानक कहीं पढ़ी हुई ये पंक्तियां आज याद आ गयीं तो लगा कि इसे ब्लॉग पर रख देना चाहिए । 

4 comments:

ममता त्रिपाठी said...

अच्छा लिखा और लिखो । अतिसुन्दरम्। प्रशंसनीय!

ममता त्रिपाठी said...

अच्छा लिखा और लिखो । अतिसुन्दरम्। प्रशंसनीय!

Unknown said...
This comment has been removed by the author.
Unknown said...

अति शोभनम्,सुन्दरम्,पवित्रम्.........................
बहुत बढ़िया सोच है,ऐसे ही हम विचारों में पक्षी की तरह भटकते रहते है।
प्रसंशाजन्य है।